आज सुबह अचानक गेट पर घंटी बजी। गेट खोला तो एक 20-22 साल का लड़का खड़ा था और बौला भैया कुछ खाने के दे दो। मैने ऊसे पैसे दिये तो उसने मना कर दिया, बौला भूख लगी है । खाना चाहिये पैसे नही। सच में वो भूखा ही था। पूछा कहां रहता है। हमारे घर से 2 कीमी दूर से आया था। उस दो कीमी में किसी ने भी उसे खाना नही दिया। हर मजबूर लालच के लिए नही मांगते। कुछ वाक़ई मजबूरी में मांगते हैं। उसने भी भूख के काराण ही मांगा। पैसे देने पर भी मना कर दिया। और हम so called civilised लोग किसी मजबूर की मजबूरी भी नही समझ सकते?
कहां जा रहे हैं हम लोग?
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